Conversation

राष्ट्रकवि दिनकर की धरती नफ़रत फैलाकर सियासत करने वालों को कभी पनपने नहीं देगी। उन्हीं के शब्दों में - "जब तक मनुज-मनुज का यह / सुख भाग नहीं सम होगा / शमित न होगा कोलाहल / संघर्ष नहीं कम होगा।"
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