Kanhaiya Kumar@kanhaiyakumarराष्ट्रकवि दिनकर की धरती नफ़रत फैलाकर सियासत करने वालों को कभी पनपने नहीं देगी। उन्हीं के शब्दों में - "जब तक मनुज-मनुज का यह / सुख भाग नहीं सम होगा / शमित न होगा कोलाहल / संघर्ष नहीं कम होगा।"Translate post5:02 AM · Apr 9, 20191,122 Reposts57 Quotes7,578 Likes3 Bookmarks3