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  1. Закачен туит
    2.08.2017 г.

    'Unless meditation becomes , you have simply wasted your time.' Oshodhara conducts 28 levels of Enlightenment programs.

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  2. преди 1 час

    Sri Lanka: At least 16 killed as police raid suspected bomber hideout in Kalmunai, Sammanthurai; seven...

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  3. преди 3 часа

    has distorted Mohammadi Islam so much that a religion of love has become symbol of -Jihad, bloodshed, terrorism & violence. All democracies must act against them, since they are their main targets.

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  4. преди 4 часа

    हर आती साँस जनम नूतन, हर जाति साँस मौत का क्षण। दोनों के मध्य ठहर जाओ, तो काहे का फिर जन्म-मरण? है आदि नही,है अंत नही, वह अलख निरंजन सत्य तुम्ही। अथ शास्वत शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।।

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  5. преди 4 часа

    गुलशन-ए-मुर्शिद: सांस का है खेल, सारी ज़िन्दगी; सांस से होती है; सारी बन्दगी। जो नहीं करता है, सुमिरन नाम का; बुझ नहीं पाती है,उसकी तिश्नगी। - सदगुरु ओशो सिद्धार्थ औलिया

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  6. преди 4 часа

    गुलशन -ए-मुर्शिद: सिर्फ ताक़त से न, होती जीत है; चाहिए संकल्प की,दीवानगी। दहशतगर्दी, कायरों का दीन है; प्यार से है जीतती, मर्दानगी । - सदगुरू ओशो सिद्धार्थ औलिया

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  7. преди 4 часа

    गुलशन-ए-मुर्शिद: सामने है रब, मगर दिखता नहीं; देख यह होती, बड़ी हैरानगी। कामिल-मुर्शिद से,न आँखें चार की; ज़िन्दगी सारी हुई,आवारगी। -सदगुरू ओशो सिद्धार्थ औलिया

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  8. преди 4 часа

    आनंद गीता: घर-घर में चर्चित काम यहाँ, मंदिर में बंदी राम यहाँ। मूर्च्छा का आसव पी-पीकर, कुछ लेते हरि का नाम यहाँ। छोड़ो प्रमाद अब ध्यान करो, कुछ भीतर अनुसंधान करो। ओंकारं शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।। - सद्गुरु ओशो सिद्धार्थ औलिया 'मुर्शिद'

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  9. преди 4 часа

    पैग़ाम-ए-मुर्शिद: अनहद गीत गा रहा कोई; शायद हमको बुला रहा कोई। जो भी सोए हुए बेहोशी में; शायद उनको जगा रहा कोई। रूहें आ जाएं उनकी महफ़िल में; शायद शमा जला रहा कोई। प्यासे रिंदों के लिए ‘मुर्शिद’ बन; शायद हाला पिला रहा कोई। - सद्गुरु ओशो सिद्धार्थ औलिया

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  10. преди 4 часа

    अवधूत गीता शब्दों में तुम मत खो जाना, सब संतो की है बात एक; आकारों में जग उलझा, वह निराकार ओंकार एक। गुरु कहो याकि गोविंद कहो वह तुमही हो,तुमही तोअहो गोविंदं शरणं गच्छामि, अवधूतं शरणं गच्छामि।।

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  11. преди 4 часа

    दीया के नीचे अंधेरा क्या करें या खुदा तू ही बता हम क्या करें लोग दैरोहरम के मुहताज हैं कुछ सयाने घट में उलझे क्या करें कोई पढ़ता वेद, गीता और कितेब ऐसे तोते-मैंनों का हम क्या करें मेरे ‘मुर्शिद’ ने कहा सिद्धार्थ सुन आसमां खुद है खुदा हम क्या करें

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  12. преди 4 часа

    यदि प्यार चाहते सदा रहे, कुछ दूरी का एहसास रहे। है प्रेम तभी ऊपर जाता, आजादी का आकाश रहे। अति-लभता रूचि घटाती है, दुर्लभता मोल बढ़ाती है। स्वातन्त्र्यं शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।।

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  13. преди 4 часа

    "गिरह खोल नहीं जानते ताते भये कंगाल"। हम सब सम्राट हैं। अमृतस्य पुत्रः , पर हमें पता ही नहीं। यही तो संतों की करुणा है । वे हमें बार-बार जगाते हैं कि तुम कौन हो ! तुम्हारा असली चेहरा क्या है ! तुम्हारी असली पहचान क्या है !

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  14. преди 4 часа

    तथाता एवं तथाता भाव में अंतर- तथाता का अर्थ है अकम्प में जीना।उसे कृष्ण स्थितप्रज्ञ, कृष्णमूर्ति चुनावरहित जागरुकता और आत्मजागरण कहते हैं।तथाता भाव का अर्थ है निष्काम में जीना,अशिकायत में जीना,स्वीकार में जीना।तथाता आत्मस्थिति है, तथाता भाव मनःस्थिति है।

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  15. преди 4 часа

    अमृत क्या है ? नाद, नूर ही अमृत है। आनंद क्या है ? तृप्त एवं अकारण प्रफुल्लता की स्थिति आनंद है। प्रेम क्या है ? अहोभाव के साथ किसी को कुछ देने का अथवा शेयर करने का भाव प्रेम है। उत्सव क्या है ? असीमित प्रेम (overflowing love) उत्सव है।

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  16. преди 4 часа

    पैग़ाम-ए-मुर्शिद: हैं सभी धर्म मुहब्बत के लिए; नहीं मज़हब है सियासत के लिए। कब समझेंगे इसे आतंकी; नहीं इस्लाम है दहशत के लिए। बन गए इतने सारे दैरोहरम; जगह बची न शराफ़त के लिए। कामिल मुर्शिद के मैकदे में आ; नबी की असली नसीहत के लिए।

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  17. преди 4 часа

    दैनिक ट्रिब्यून » News प्रेम से खिलता है भक्ति का फूल - दैनिक ट्रिब्यून: ओशो सिद्धार्थ औलिया

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  18. преди 5 часа

    The Best Treatments for Fibromyalgia via

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  19. преди 7 часа

    for teaching , and are required to teach at Trivir Public School (Class I to V) Karma, Bihar from 17-30 June,19. They will get 2AC train fare along with free boarding & lodging. Email your resume to tpskarma1@gmail.com

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  20. преди 7 часа

    माना वह नर है दुखियारा, जिसने जाना हरिनाम नहीं। लेकिन कितना दुर्भाग्य नाम जाना, पर पाया राम नहीं। मत राम - नाम से कर क्रीड़ा, वरना फंस जाएगा बेड़ा। अथ श्रद्धा शरणं गच्छामि, भज ओशो शरणं गच्छामि।। -सद्गुरू ओशो सिद्धार्थ औलिया

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  21. преди 7 часа

    चलते हैं लाखों लोग यहाँ, पर कुछ ही मंजिल पाते हैं। इसलिए नहीं कि राह कठिन, इसलिए कि रुक - रुक जाते हैं। मृत्यु से मत होना गाफिल, इलहाम जिन्दगी की मंजिल। संबोधिं शरणं गच्छामि, भज शरणं गच्छामि।।

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