चंपारण की पवित्र गंडक नदी के कैलाश बाबा घाट पर श्रद्धेय अटल जी की अस्थि विसर्जन किया। इस अवसर पर आयोजित श्रंद्धाजलि सभा को संबोधित करते हुए।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उनमें भारत का भविष्य देखा था। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए यह कहा था कि एक दिन वे भारत का नेतृत्व करेंगे। डॉ.राम मनोहर लोहिया उनके हिन्दी प्रेम के प्रशंसक थे।पूर्व प्रधानमंत्री श्री चन्द्रशेखर उन्हें संसद में ‘गुरूदेव’ कहते थे
जितना सम्मान, जितनी ऊंचाई अटल जी को मिली, उतना ही अधिक वह जमीन से जुड़ते गये। सफलता को कभी भी उन्होंने मस्तिष्क पर प्रभावी नहीं होने दिया। अटल जी कहते थे कि–
“हे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना।
गैरों के गले ना लग सकूं, इतनी रूखाई कभी मत देना” #AtalBihariVajpayee
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