6. मध्य वर्ग का विस्तार सवर्ण जातियों में काफी हद तक हो चुका है. 7. अब मध्य वर्ग का विस्तार मझौली और कभी अछूत मानी गई जातियों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के नीचे के तबकों में होना है. 8. भारतीय समाज व्यवस्था इसकी इजाजत नहीं देती कि इन तबकों तक धन और समृद्धि पहुंचे
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9. बाजार चाहता है कि मध्य वर्ग का विस्तार हो. समाज व्यवस्था चाहती है कि ऐसा न हो. 10. मौजूदा दौर की सबसे बड़ी लड़ाई बाजार और जातिव्यवस्था के बीच है. 11. वंचित जातियों में मध्य वर्ग के सृजन का सबसे बड़ा उपकरण आरक्षण है. 12. समाज व्यवस्था आरक्षण का अंत चाहती है.
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13. वंचित जातियों के लोग मध्य वर्ग में शामिल न हों. इसलिए आरक्षण का विरोध किया जा रहा है. 14. ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से सही है, क्योंकि शूद्रों के धन संचय पर शास्त्रों में रोक है. 15. बाजार और आरक्षण इन दोनौं का साक्षा हमला जाति व्यवस्था पर है.
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16. शहरीकरण का भी दबाव जाति व्यवस्था पर है. 17. जाति व्यवस्था अगर जीत जाती है, तो भारत दुनिया का सबसे पिछड़ा और गरीब देश बना रहेगा. 18. जाति व्यवस्था से टकराए बिना भारत की अर्थव्यवस्था आगे नहीं बढ़ सकती.
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19. जातिवाद को बचाना आरएसएस और ब्राह्मणवादियों की बड़ी चिंता है क्योंकि बाजार और आरक्षण ने उसकी जड़ों को हिला दिया है. 20. इस प्रक्रिया को रोकने के लिए ही आरएसएस ने मुसलमानों का हव्वा खड़ा किया है, वरना मुसलमान शासन के दौरान सवर्ण हिंदुओं के सुख में कोई कमी नहीं आई थी.
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21. जाति व्यवस्था के नाश और भारतीय मध्य वर्ग के वंचित जातियों में फैलने से ही भारतीय अर्थव्यवस्था आगे बढ़ सकती है. 22. जाति और बाजार का अंतर्विरोध मौजूदा दौर में भारत का प्रमुख अंतर्विरोध है.
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23. जाति व्यवस्था ने बाजार के साथ जिंदा रहने के तरीके ढूंढने शुरू कर दिए हैं. 24. इस बिंदु पर भारत का भविष्य निर्धारित होगा.
Prikaži ovu nitHvala. Twitter će to iskoristiti za poboljšanje vaše vremenske crte. PoništiPoništi
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Hi!, you can read it here: Thread by
@Profdilipmandal: भारत की अर्थ व्यवस्था और जाति व्यवस्था पर मेरी थीसिस. कॉपी करने पर मेरा नाम जरूर दें. 1.… https://threadreaderapp.com/thread/1223859777991839745.html …. Have a good day.
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I agree on your points of views. I wrote on the issue. The first government must do, increase number of working days in rural areas. Today Marginal Farmers, Labors, land less labor and Tribal has only 90 to 120 days full time work, this must increase to 300 days under employment
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जातिव्यवस्था ही ऐसा करने से रोकती हैं।जातिव्यवस्था बनाए रखने वाले ऐसा होने से रोकते हैं।जातिव्यवस्था में सवर्णों को ही संपत्ति का संचयन करने का अधिकार देती हैं।इसलिए सवर्ण दलित आदिवासी पीछडों के आरक्षण का विरोध करते हैं।आरक्षण से दलित आदिवासी पीछडों को आगे बढ़ने का मौका मिलता हैं
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