मेरा हिमालय ================ 'हिमालय' का प्यारा अंचल 'उत्तराखण्ड' प्राचीन काल में खश, कोल, किरात, किन्नर, गन्धर्व, आदि जातियों से सम्बन्धित रहा है। आज भी इस प्रदेश में थारू, बोक्सा, राजी, भोटिया एवं जौनसारी जनजातियां रहती हैं।
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विभिन्न जातियों का सम्मिश्रण होते हुए भी इस ' देवभूमि' की सांस्कृतिक परम्परायें एक ही है। इसलिए यह उत्तराखण्ड अपनी इस सुदृड़ समन्वयात्मक सामाजिक परम्पराओं के लिए भी जाना जाता है। यहां का लोक जीवन सदा ही धर्म प्रधान व कलामय रहा है।
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भौगोलिक परिस्तिथियों के कारण यहां के लोग अपना जीवन निर्वाह बहुत कठिन परिस्तिथियों में करते हैं। यहां के निवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि एवं पशुपालन है। सांस्कृतिक परम्पराओं एवं नैसर्गिक सौन्दर्य का धनी यह प्रदेश आर्थिक दृष्टि से देहरादून, हरिद्वार एवं ऊधमसिंहनगर को
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छोड़कर पहाड़ी क्षेत्र पूर्व में थोड़ा सुविधाओं में पिछड़ा था। पर हमारी सरकार ने हमेशा ही पूरे राज्य के विकास को सर्वोपरि माना है।शीघ्र ही 'आल वैदर रोड' और 'ऋषिकेश- कर्णप्रयाग रेलवे लाईन' राज्य की विशेषकर पहाड़ी क्षेत्र के विकास की रेखा बनने वाली हैं।
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