मेरा हिमालय ============== हिमालय में अलकनंदा के दूसरी तरफ पांच किलोमीटर की दूरी पर माणा गांव है। पौराणिक आलेखों के आधार पर इसे मणिभद्रपुरम कहा गया है। माणा गांव की जनजातियों का रहन- सहन, खान-पान रूप रंग प्रायः तिब्बती लोगों से मिलता है।
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इन्हें भोटिया के नाम से जाना जाता है। माणा घाटी के समान दूसरी घाटी नीती घाटी है। दोनों घाटियों के मूल निवासियों को मार्छा (भोटिया) नाम से जाना जाता है। भोटिया मारछा का उत्तराखंड की जनजातियों में विशेष स्थान है।
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यह जनजातियां उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ के सीमान्त भाग में कबीले रूप में निवास करती हैं। मुख्यता: जांडगंगा उत्तरकाशी जनपद, विष्णु, गंगा, धौली, नीतीपास, कठियागली, दारमा, आदि नदियों की घाटियों में वर्षों से रह रहे हैं।
8:52 PM - 16 May 2018
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