ऐसी पौराणिक कथाएं हैं कि भगवान शंकर जब केदारनाथ में अन्तर्रध्यान हुए तो उनके अंग विभिन्न स्थानों में प्रकट हुए। उनके धड़ का ऊपरी हिस्सा पशुपतिनाथ- काठमांडू, नेपाल में प्रकट हुआ। भुजायें तुंगनाथ में, मुख रुद्रनाथ में, नाभि मदमहेश्वर में और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुई।
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पशुपतिनाथ जी को छोड़कर शेष 'पंचकेदार' उत्तराखंड में विद्यमान हैं। सभी शैव तीर्थ माने जाते हैं। केदारनाथ में हिमश्रृंखला बहुत रमणीक है। मंदाकिनी के हिमनद (ग्लेशियर ) से 2 धारायें निकलती हैं, एक धारा को 'दूध गंगा' कहते हैं और दूसरी को 'मंदाकिनी'।
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चोरावाड़ी ताल को अब गांधी सरोवर कहा जाता है। केदारनाथ से कुछ दूरी पर वासुकिताल है। इन हिमनदों में ब्रहमकमल,जटामांसी, कुटकी, धूप, मठोसल, आकाशमांसी, मुरामांसी, अतीस, चोरा, गन्ध्रयाण, छुपी आदि कतिपय दिव्ययौषधियां पाई जाती हैं।
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जेडीएस- MLA गिनते हुए 1,2,3....38" दोबारा गिनती गिनते हुए "1,2,3....33

सालो दरवाज़ा बंद करो अमित शाह इधर ही घूम रहे है 

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इस अभूतपूर्व जानकारी साझा करने के लिऐ बहुत धन्यवाद
@DrRPNishank मेरे लिऐ यह एक नयी जानकारी थी।Thanks. Twitter will use this to make your timeline better. UndoUndo
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