स्कन्दपुराण में बद्रीनाथ का उल्लेख विशेष रूप से मिलता है। यहां पर बोद्ध एवं देवी देवताओं के मन्दिर भी हैं। तिब्बत सीमान्त क्षेत्र होने के कारण बोद्ध मतावलम्बी भोटिया जनजातियों का इन स्थानों में निवास होने के कारण बौद्ध संस्कृति भी देखने को मिलती है।
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बदरीवन के विषय में स्कन्दपुराण में कहा गया है कि यह उत्तराखंड हिमालय धार्मिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है उससे अधिक हिमालय के हिमनदों एंव घाटियों में पैदा होने वाली दिव्यौषधियों के लिए उपयोगी है। गन्धमादन पर्वत एवं बद्रीवन क्षेत्र जड़ी- बूटियों के लिए मुख्य उपयोगी है।
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सा गंधमादन लता कुसुमौघ लक्ष्मी। सा दिव्यतुड्ग हिमवन्नव श्रृंगपंक्ति गंगा च पुण्यसलिता किमुयन्नरम्यम् त्वामागतोऽस्मिशरंणं बदरी वनेऽस्मीन ---------स्कन्दपुराण
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