मेरा हिमालय ============== भारतीय परम्पराओं के अनुसार 'देवभूमि उत्तराखण्ड' मध्य हिमालय का वह भाग है जो कि आध्यात्म एवं आयुर्वेद की औषधियों का स्त्रोत है। इसी हिमालय में अंगिरा, जमदग्नि, वशिष्ठ, कष्यप, भृगु, आत्रेय, भारद्वाज, चरक आदि ऋषियों ने लोक हित एवं रोगों के
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महर्षि चरक- यायावर के रूप में उत्तराखण्ड हिमालय की घाटियों, पर्वत, शिखरों में पर्यटन कर जड़ी- बूटियों की खोज का स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि पौड़ी के कोटद्वार तहसील, दोगड्डा विकासखंड के एक शिखर का नाम 'चरख डाण्डा' है।
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बाल्मीकि रामायण में वर्णित 'संजीवनी परिवार' की दिव्यौषधियां का पर्वत 'द्रोणागिरि' भी तो उत्तराखण्ड हिमालय में ही विद्यमान है।
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