मेरा हिमालय =============== 'हिमालय' अपने देश की सीमा पर है, अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए यह जरूरी है की वहां तक आसानी से देश की सेना आ जा-सके। इसके लिए आजादी के बाद 'हिमालय' में सड़कों का जाल बिछाया गया। हिमालय में पुराने समय में सब्जी या फल की खेती भी बहुत कम ही होती थी,
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इसका एक महत्वपूर्ण कारण था यातायात के साधनों में कमी। पहाड़ी क्षेत्र में सड़के बिछाना बहुत कठिन काम होता है, इसी कारण पहले हिमालय में सड़कें बहुत कम संख्या में थी। लोग मीलों संकरी, ढलवा पहाड़ी, पगडंडियों से चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते थे।
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सन् 1947 के बाद पहाड़ों में बहुत दूर- दराज के पहाड़ी इलाके भी सड़कों से जुड़ गए। परिवहन के साधनों के बढ़ने से अब 'हिमालय' की सूरत ही बदल रही है। 'हिमाचल' क्षेत्र के सेब, आलू, 'हिमालय' की फल व सब्जियां, जड़ी -बूटियां देश के अन्य हिस्सों के
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साथ- साथ विदेशों तक अपनी पहुंच बना रही है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री 'मोदी जी' ने हिमालय के संरक्षण, संवर्द्धन और 'मां गंगा' के पुनर्उत्थान हेतु आवश्यक कदम उठाए हैं। उत्तराखण्ड हिमालय में भी चारधाम के लिए 'आॅल वैदर रोड' स्वीकृत की है जो 'उत्तराखण्ड' के विकास में
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मील का पत्थर साबित होगी, इसके अतिरिक्त मोदी जी ने 'ऋषिकेश- कर्णप्रयाग रेल लाइन' के अति महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को स्वीकृत किया है। हम सबका हिमालय शीघ्र ही प्रधानमंत्री मोदी जी के कर्तव्यनिष्ठा से विकास की ओर बढ़ेगा।
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