मेरा हिमालय ================ 'उत्तराखण्ड हिमालय' जिसकी अपनी एक अनुठी संस्कृति व सभ्यता है। यह ऋषि- मुनियों व नदियों के समागम की पवित्र भूमि के रूप में प्रसिद्ध है। यहां की पावन भूमि प्राकृतिक रूप से अत्यन्त समृद्ध है। यहां की ऊंची हरितिमा से भरी अधिपत्यकाएं व घाटियां
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स्वच्छ वातावरण व जलवायु लोक मानस के प्रेरणा श्रोत हैं। इसलिए यहां का लोक साहित्य रसपूर्ण व एक अनोखी मादकता से भरपूर है। प्रकृति प्रेम से लबरेज़ यहां के जनमानस के गीतों में वृक्षों, पेड़- पौधों का प्रयोग हुआ है। उत्तराखण्ड हिमालय के मानवों ने अपने गीतों में अधिकांश
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उन्हीं पेड़ -पौधों का प्रयोग किया हुआ है जो उनके लिए अधिक उपयोगी साबित हुए हैं या जो ज्यादातर उनके आसपास उगते हैं। हिमालय के लोगों का जन- जीवन का प्रत्येक पल प्रकृति के जीवों व वनस्पतियों के बिना अधूरा है।
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यहां पर प्रचलित रीति- रीवाज, गीत एवं अन्य जनमानस के प्रकृति प्रेम को दर्पण की तरह प्रतिबिंबित करते हैं। प्रकृति प्रेम से ओतप्रोत सांस्कृतिक व धार्मिक गीत यहां की सभ्यता को एक विशिष्ट स्थान भी प्रदान करते हैंl
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