स्वच्छ वातावरण व जलवायु लोक मानस के प्रेरणा श्रोत हैं। इसलिए यहां का लोक साहित्य रसपूर्ण व एक अनोखी मादकता से भरपूर है। प्रकृति प्रेम से लबरेज़ यहां के जनमानस के गीतों में वृक्षों, पेड़- पौधों का प्रयोग हुआ है। उत्तराखण्ड हिमालय के मानवों ने अपने गीतों में अधिकांश
-
-
Show this thread
-
उन्हीं पेड़ -पौधों का प्रयोग किया हुआ है जो उनके लिए अधिक उपयोगी साबित हुए हैं या जो ज्यादातर उनके आसपास उगते हैं। हिमालय के लोगों का जन- जीवन का प्रत्येक पल प्रकृति के जीवों व वनस्पतियों के बिना अधूरा है।
Show this thread -
यहां पर प्रचलित रीति- रीवाज, गीत एवं अन्य जनमानस के प्रकृति प्रेम को दर्पण की तरह प्रतिबिंबित करते हैं। प्रकृति प्रेम से ओतप्रोत सांस्कृतिक व धार्मिक गीत यहां की सभ्यता को एक विशिष्ट स्थान भी प्रदान करते हैंl
Show this thread
End of conversation
New conversation -
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.