झील के दर्शन आस्था और रोमांच के मध्य प्रकृति दर्शन है। स्कन्दपुराण के केदारखण्ड में इस झील का वर्णन इस प्रकार है- "तद् सत्यपंथ नाम तीर्थ सर्व मनोहरम त्रिकोण, कारयैवेवत कुण्ड कल्मषनाशनम। एकादश्या हरिस्त अय स्वयमायाति पावने" आशय यह है कि सत्यपंथ नामक तीर्थ मनोहारी है।
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यह तिकोने आकार का जलकुण्ड सर्वपाप हारी हैं। एकादशी दिवस पर इस सरोवर में देवतागण स्नान करते हैं।
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