मेरा हिमालय ================ व्यक्ति के जीवन में 'जल' का महत्व समझते हुए व्यक्ति को स्वच्छ एवं निर्मल जल प्राप्त हो, मानव 'गंगा' की निर्मलता बनाये रखे, इसलिए गंगा को 'माता' एवं महिलाओं के सौभाग्य का प्रतीक मानते हुए, हिमालय को, हिमालय से बहने वाली जलधारा को,
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उसमें उगने वाली वनस्पति एवं औषधि को तथा वहां पर रहने वाले पशु पक्षियों की सुरक्षा को ध्यान में रख प्राचीन मनीषियों ने 'हिमालय' को 'शिव' और 'गौरी' का निवास स्थल बताकर हमारी परम्पराओं में हिमालय को ईश्वरीय रूप देकर इस स्थान की पवित्रता को बनाये रखते हुए पर्यावरण संतुलन बनाकर,
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यहां के रीति -रिवाजों एवं संस्कृति को पुष्पित और पल्लवित किया। 'अथर्ववेद' में भी सुखमय जीवन के लिए हिमालय की आराधना की गयी है।
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यहां पर उत्पन्न जितनी भी वनस्पति एवं औषधि हैं, उसे किसी न किसी भगवान की प्रिय वस्तु बताकर लोगों को उनसे जोड़े रखा है। जैसे- तुलसी, हल्दी, पीपल, वट, आंवला, दूर्वा, पुष्प इत्यादि।
7:33 PM - 10 Mar 2018
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