मेरा हिमालय ============== वन और वनौषधियों को प्रकृति की महती देन माना गया है।आयुर्वेद के इस मान्यता प्रकरण की उपस्थिति हिमालय और उत्तराखण्ड के लोकजीवन में पूर्णतः रही है। वन और वनौषधियों के साथ उत्तराखण्ड हिमालय का याज्ञिक सम्बन्ध रहा है,
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वृक्षों को संरक्षित रखने के लिए, अरण्यों की उपस्थिति को आवश्यक मानते हुए उनकी रक्षा के लिए, कहीं- कहीं पूरे जंगल को देवमय माना गया है।
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वृक्षों के नीचे पाषाण विशेष की स्थापना के साथ इष्ट देव को प्राणप्रतिष्ठा का पात्र माना गया है, जो उत्तराखंड हिमालय की प्रकृति के रक्षा भाव एवं उसके साथ संस्कृति के सम्मेलन को समुचित करता है।
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