मेरा हिमालय ============== आदि पर्व में हिमालय की वंदना है- हिमवन्त भारत की उत्तरी सीमा पर स्थित एक विशाल पर्वतराज है जो शरीर से पर्वत होते हुए भी आत्मा से देवता है। युग युगों से मानव को आमंत्रण देती हिमालय की हिमाच्छादित चोटियां,
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यह जानना भी आवश्यक है कि किस प्रकार तीर्थों की यहां अवधारणा हुई, आश्रम बने, और देवमूर्तियों के गुहा तथा चत्वर जैसे देवायतन कैसे विशाल एवं भव्य मन्दिरों में परिवर्तित हुए। हिमालय का इस प्रकार का ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अध्ययन वर्तमान युग में अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
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पोखरियाल जी का बहुत बहुत आभार की उन्होंने उत्तराखंड में राजनितिक जीवन की प्रारम्भ कर्णप्रयाग विधानसभा से की हम उन्हें देखते और सपोर्ट करते बड़े हुवे है, उन्होंने पलायन को रोकने के अथक प्रयास किये, जिसका प्रणाम है की वो आज दिल्ली शिफ्ट होगये,,
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