मेरा हिमालय ============= उत्तराखण्ड हिमालय के 'पांच प्रयागों' में 'देवप्रयाग' को प्रमुखता से माना गया है, 'प्रयाग' का सामान्य अर्थ है जो 'यज्ञों' से भी बढ़कर है- 'यागेभ्यः प्रकृष्टः'।
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यहां संगम पर अनेक 'पवित्र कुण्ड' हैं। 'अलकनंदा' और 'भागीरथी' की पवित्र और निश्चल लहरों से संगम का दृश्य रोमांचकारी हो जाता है। देवप्रयाग तीन पर्वतों, दशरथाचल,गृध्र पर्वत और नरसिंह के बाहुओं के समाप्ति स्थल पर बसा है। इन पर्वतों को भागीरथी और अलकनंदा की धारायें पृथक करती हैं।
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अलकनंदा और भागीरथी यहीं पर संगम करती हुई 'गंगा' का विख्यात एवं सर्वमान्य नाम धारण करती हैं। प्रयाग राज के समान यहां भी त्रिधारा या त्रिवेणी कहने हेतु, एक छोटी जलधारा 'शान्ता धारा' के नाम से दशरथाचल से आती हुई इसमें मिलती है।
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