देवप्रयाग नगर के मध्य में गृध्र पर्वत की बाहु को काटकर बनाए गए चौड़े समतल स्थान में यहां उत्तराखण्ड का प्रसिद्ध रघुनाथ मन्दिर स्थापित है, जिससे संगम स्थल तक चट्टानों को काटकर बनायी गयी एक सौ एक सीढियां की उतार और चढ़ाई दोनों ही मानव आस्था की परीक्षा लेती दिखाई देती हैं।
-
-
Show this thread
-
यहां संगम पर अनेक 'पवित्र कुण्ड' हैं। 'अलकनंदा' और 'भागीरथी' की पवित्र और निश्चल लहरों से संगम का दृश्य रोमांचकारी हो जाता है। देवप्रयाग तीन पर्वतों, दशरथाचल,गृध्र पर्वत और नरसिंह के बाहुओं के समाप्ति स्थल पर बसा है। इन पर्वतों को भागीरथी और अलकनंदा की धारायें पृथक करती हैं।
Show this thread -
अलकनंदा और भागीरथी यहीं पर संगम करती हुई 'गंगा' का विख्यात एवं सर्वमान्य नाम धारण करती हैं। प्रयाग राज के समान यहां भी त्रिधारा या त्रिवेणी कहने हेतु, एक छोटी जलधारा 'शान्ता धारा' के नाम से दशरथाचल से आती हुई इसमें मिलती है।
Show this thread
End of conversation
New conversation -
-
-
Good morning Sir ji

Thanks. Twitter will use this to make your timeline better. UndoUndo
-
-
-
Gudmng sir.. Have a good day..
Thanks. Twitter will use this to make your timeline better. UndoUndo
-
-
-
देव भूमि उत्तराखंड की जय हो
Thanks. Twitter will use this to make your timeline better. UndoUndo
-
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.