"केदारं मध्यमं तुड्गं रूद्रं कल्पेश्वरं प्रियम। पन्च केदारकं नित्य स्मरेत्पातक नाशनम्"।। अर्थात केदारनाथ, मध्यमहेश्वर, तुंगनाथ, रूद्रनाथ और कल्पेश्वर नाम के पांच केदारों का नित्य स्मरण करने पर समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
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साथ ही यह भी अवधारणा सुनने को मिलती है कि मध्यमहेश्वर केदार शिव का नाभि भाग है, तुंगनाथ बाहु भाग है। रूद्रनाथ मुख है और कल्पेश्वर जटाजूट है। रूद्रप्रयाग संगम में पंचकेदार के चरण हैं और इन्हीं चरणों से होकर केदार यात्रा का प्रारम्भ भी होता है।
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हिमालय शिव का आश्रय है और शक्ति की जन्मस्थली है। हिमालय और इससे प्रभावित भू-क्षेत्र के चिंतन में शिव और शक्ति का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।
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आप सभी को "शिवरात्रि के पावन अवसर" पर पवित्र हिमालय और जय और विग्रह देने वाले, जगत के ईश 'भगवान शंकर' और 'जगतजननी शक्ति' का आशीष प्राप्त हो।
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