मेरा हिमालय प्रकृति द्वारा प्रदत्त किसी भी क्षेत्र में चारों ओर से घिरी हुई भूमि में जल एकत्रित रहता है उसे 'ताल' कहते हैं। हिमालय की भौगोलिक विभिन्नता की भूमि में कहीं- कहीं तीन ओर से घिरी हुई भूमि चौथे कोने में कभी भूस्खलन होने से 'तालाब' का रूप ले लेती है।
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इन तालाबों में जल के स्रोत भी होते हैं वहीं वर्षा का जल भी इसमें संकलित हो जाता है। कभी-कभी नदी की बाढ़ में भी मोड़ आने पर वह भी 'जलाशय' का रूप ले लेती है। नालों में भी जब कभी अधिक भूस्खलन होता है, तब ऐसे नाले भी तालाब का रूप धारण कर लेते हैं।
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उत्तराखण्ड हिमालय में 'नैनीताल' जनपद में विभिन्न आकार के नैनीताल, सूखाताल, खुरपाताल, सड़ियाताल , नौकुचियाताल, भीमताल, सातताल आदि हैं। वहीं पिथौरागढ़ में गोरीताल, पार्वती ताल, चम्पावत में श्यामलाताल, अल्मोड़ा में तड़ागताल, बागेश्वर में कुण्डताल,
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जिन्हें वर्तमान समय में बड़े स्थल होने के कारण 'झील' व कहीं तो 'कुण्ड' कहा जाता है और क्षेत्रफल में छोटे जलाशय को मात्र 'ताल' बोलते हैं जैसे 'उच्च हिमालयी' क्षेत्र में राक्षसताल, गौरीताल, मानसरोवर ताल, पार्वतीताल इत्यादि।
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हिमालय का मानव पूर्व में इन्हीं नदी घाटियों एवं ताल से ही पानी पीता था।
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