मेरा हिमालय ============== उत्तराखण्ड हिमालय की सुदूर उत्तरवर्ती मे मेषपालक (भेड़पालक) जाति मेषों का पालन रोजगार के साथ पशु प्रेम के लिए भी करती है। यहाँ नंदा माता का कोई विशेष आशीर्वाद ही होता होगा कि मेषों में कुछ मेष 'चौसिंगिया' या चार सींग के भी होते हैं।
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प्रकृति की तरफ से कोई ऐसा प्रबंध होता होगा कि विविध वर्णों के साथ पालतू पशु घोड़े,गाय, बैल आदि पैदा होते हैं। उत्तराखण्ड हिमालय में ऐसे आश्रमों का उल्लेख मिलता है, जहां पशु-पक्षी अपने शाश्वत बैर को छोड़कर मित्र भाव के साथ रहते थे।
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कोटद्वार का 'कण्वआश्रम' और मुनस्यारी का 'कालामुनि आश्रम' उपरोक्त समस्त बातों के साथ उत्तराखण्ड की विशेषता को आधुनिक विकसित देशों में अपने महत्त्व को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।
9:19 PM - 2 Feb 2018
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