दार्शनिक, विद्वान, लेखक और आत्मतत्व की खोज में संलग्न, ऋषि- महर्षि सभी ने अपने को सांसारिक मायाजाल से ऊपर उठाने के लिए, वाल्मीकि और व्यास युग से लेकर आज तक हिमालय की प्राकृतिक शोभा का रसास्वादन किया है"।
-
-
Show this thread
-
'हिमालय' का महत्त्व और उसकी शोभा, प्राचीन काल से साहित्यकारों का प्रिय विषय रही हैं। इसकी क्षण- क्षण नवीन होती सुंदरता और इसका भव्य विशाल स्वरूप, पुराणों से लेकर आधुनिक साहित्य तक में वर्णन का मुख्य केन्द्र रहा है।
Show this thread
End of conversation
New conversation -
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.