मेरा हिमालय 'ऋग्वेद' के दशमण्डल से ज्ञात होता है कि सपतसैन्धव आर्य हिमालय की वनौषधियों, वनस्पति भण्डार की अद्भुत क्षमता से बड़े प्रभावित थे।
-
Show this thread
'अथर्ववेद' में सुखमय जीवन के लिए 'हिमालय' की आराधना की गयी है- ' हे हिमवंत, तेरे हिम धवल पर्वत, तेरे वन, उपवन सब हमारे लिए सुखमय हों' गीता में श्रीकृष्ण ने अपनी सम्पूर्णता, व्यापकता के परिचय के समाहार के अंत मे कहा- पार्थ मैं स्थावरों में हिमालय हूं'
7:33 PM - 19 Jan 2018
1 reply
7 retweets
28 likes
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.