मेरा हिमालय =============== भारतीयों के ही समान, विदेशी पर्यटक,पर्वतारोही,लेखक भी 'हिमालय' के आकर्षण से मुग्ध होते रहे हैं।'शेरिंग' की पुस्तक 'वेस्टर्न तिब्बत एण्ड ब्रिटिश वार्डरलैण्ड' पर्वतारोहियों की प्रिय पुस्तकों में से एक हैं
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-"हमारी सुन्दर पृथ्वी का एक भी स्थान, इन हिमाच्छादित श्रेणियों के अद्भुत सौन्दर्य की बराबरी नहीं कर सकता। वाल्मीकि का यह कथन सत्य है कि और हिमराशि का स्मरण करने मात्र से ही मनुष्य मुक्त हो जाता है"
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'स्वेन हेडिन' ने 'हिमालय' के बाद उसके पार जाकर तिब्बत का अन्वेषण किया था, उन्होंने कैलाश- मानसरोवर क्षेत्र में जाकर जब कैलाश पर्वत को देखा तो उसकी उठान, गठन और शीर्ष पर हिमराशि की धवल भव्यता से चकित रह गए।
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तब उन्होंने 'ट्रांस हिमालय' में लिखा- "अन्य धर्मों के अनुयायी और वे विदेशी जो मिट्टी, पत्थर चट्टान के ढेर अर्थात पहाड़ के प्रति श्रद्धा या पूज्य भाव नहीं रखते, वे जब कैलाश को देखते हैं भय और श्रद्धा से भर जाते हैं।
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