मेरा हिमालय वर्ष 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद ने उत्तराखण्ड हिमालय में कई बार प्रवास किया। इस अवधि में विवेकानंद विचारों की बौद्धिक विराटता, चिन्तन तथा क्रियान्वयन की उर्जा के शीर्ष पर थे। 1/5
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ऐसे समय में नकारात्मक शक्तियों से दूर हिमालय के शक्ति पुंज में विवेकानंद के आगमन से उन्हें एक ऐसी स्फूर्ति प्राप्त हुई जिससे विश्व को भारतवर्ष को समझने व जानने का अवसर प्राप्त हुआ। 2/5
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यह अवसर सितंबर वर्ष 1893 में शिकागो में अन्तरराष्ट्रीय धर्म संसद में विवेकानंद के व्याख्यानों के माध्यम से विश्व को प्राप्त हुआ । 3/5
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उत्तराखण्ड हिमालय को "शक्ति पुंज" कहते हुए स्वामी विवेकानंद ने कहा गिरिराज हिमालय वैराग्य एवं त्याग के सूचक हैं तथा वह सर्वोच्च शिक्षा जो हम मानवता को सदैव देते रहेंगे त्याग ही है । 4/5
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जिस प्रकार हमारे पूर्वज अपने जीवन के अन्त काल में इस हिमालय पर खिंचे चले आते थे, उसी प्रकार भविष्य में पृथ्वी भर की शक्तिशाली आत्माएं इस गिरिराज की ओर चली आयेंगी। स्वामी विवेकानंद ने ये विचार वर्ष 1897 में अपने अल्मोड़ा प्रवास में व्यक्त किए । 5/5
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