स्कन्दपुराण के 'केदारखन्ड' में इस झील का वर्णन इस प्रकार है- "तद् सत्यपंथ नाम तीर्थ सर्व मनोहरम त्रिकोण, कारयैवेवत कुण्ड कल्मषनाशनम। एकादस्य हरिस्त अय स्वयमायाति पावने।।" 2/3
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आशय यह है कि सत्यपंथ नामक तीर्थ मनोहारी है। यह तिकोने आकार का जलकुंड सर्वपाप हारी है। एकादशी दिवस पर इस सरोवर में देवतागण स्नान करते हैं। 3/3
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