इनकी काफी बड़ी संख्या लद्दाख, सिक्किम, अरूणाचल प्रदेश के अलावा नेपाल, भूटान और चीन के कुछ भागों में भी पाई जाती है। उत्तराखण्ड में इन्हें 'हिम बाघ' या 'थारूआ' कहा जाता है और यह समझा जाता है कि यह 3000 मीटर की ऊँचाई पर रहता है। 2/2
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पोखरियाल जी! यदि ऐसा ही पलायन होता रहा तो पूरा उत्तराखंड आपकी इन बिल्लियों का अभयारण्य बन जायेगा।
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bhaisahb pradam
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सर् पहाड़ी मूल के लोगो को गिननां चालू कर दे ! प्रदेश के विकाश पुरुष नेताओ की मेहरबानी से पहाड़ो मे बाहरी लोग ज्यादा पहाड़ी कम देखने लगे है! प्रणाम
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बिलकुल सही कहा आप ने हमें भी कुछ समय के लिए सिर्फ विकाश की तरफ ध्यान लगाना होगा व बहरी व्यक्तियों को सिर्फ udhyog धंदे लगाने की ही इजाजत देनी चाहिए इस से विकास बढ़ेगा व गुंडे मवालियों के यहाँ पर बसने की भी पाबन्दी हो जाएगी
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