स्थानीय कृषकों को भी उन्हें प्राप्त करने एवं उपजाने में आसानी होती है। इस प्रकार की फसलें न सिर्फ अपने दबाव प्रतिरोधक क्षमता और लचीलेपन के दृष्टिकोण से अहम है बल्कि ये अपने पौष्टिक हितों के कारण भी महत्वपूर्ण है। 2/3
-
-
Show this thread
-
यह फसलें न सिर्फ उन स्थानीय 'हिमालयी समुदायों' के लिए ही अच्छी है जो उन्हें उगाते हैं और बेचते हैं बल्कि ये विश्वभर की आनुवांशिक संसाधन में भी अपनी हिस्सेदारी सांझा करती है। 3/3
Show this thread
End of conversation
New conversation -
-
-
रमेश दा पहाड़ की विरासत को दिल्ली के मैदान में प्रदर्शित करने के लिये आप जैसे पहाड़ के नेताओं को नेतृत्व करना चाहिये क्यों न सक्रांति के पावन
-
क्यों ना हिन्दुओ के महापर्व सक्रांति जो हमारे पहाड़ में उत्तरेण्णी मकरेंनी के नाम से जाना जाता है उसे केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली में हम
-
दिल्ली में हम पहाड़ी लोग सेल्ब्रेट करें जिसका मैने पहले भी आपसे अनुरोध किया था।दिल्ली में केजरीवाल सरकार ऐसे उत्सवों के लिये फण्ड प्रदान करती
-
दिल्ली की aap सरकार इन उत्सवों के लिये फण्ड प्रदान करती है तथा हम घोंडा विधानसभा के लोग अपना उत्तरेण्णी मकरेंनी त्योहार धूमधाम से मनाते है
-
रमेश दा अगर आपके प्रयासों से ऐसा कुछ आयोजन हो सके तो अच्छा है। आपका उत्तराखंडी मूल का बीजेपी4दिल्ली कार्यकर्ता एवंम आरएसएस स्वमं सेवक घोंडा
End of conversation
New conversation -
-
-
हिंदुस्तान कि देवभूमी
Thanks. Twitter will use this to make your timeline better. UndoUndo
-
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.