मेरा हिमालय =============== 'हिमालय' एवं 'गंगा' भारतीय संस्कृति व सभ्यता में 'पिता' और 'माता' के समरूप पूजनीय हैं। प्रकृति में श्रद्धा माता-पिता के प्रति श्रद्धा के समान ही है।
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राजा 'भगीरथ' अपने पुरखों के प्रति श्रद्धा रखते हुए उनके उद्धार के लिए 'हिमालय' में कठोर तप कर 'गंगा' का अवतरण कराते हैं। भारतवर्ष का लोकमानस 'गंगा' में स्नान कर स्वयं और अपने पूर्वजों में श्रद्धा का ही सामंजस्य स्थापित करता है।
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हिमालयी आस्था एवं तीर्थों में भी यही भाव विद्यमान होता है। आईये 'श्राद्ध पक्ष' के आज 'पितृ विसर्जन' में अपने 'पित्रों' और 'प्रकृति' में अपनी श्रद्धा को अटूट बनाने का संकल्प लें।
9:24 PM - 7 Oct 2018
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