पूर्व में तिब्बत, दक्षिण में कुल्लू से, पश्चिम में बाल्टी घाटियों से मुस्लिम समुदाय और उत्तर से मध्य एशिया के कारवां यहां आते थे। आज भी विमान भरकर यात्री यहां उतरते हैं, और इसका जादू कम नहीं हुआ है। पदयात्रियों और पर्वतारोहियों की दिलचस्पी के यहां कई स्थान हैं। 2/4
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'रूप्शू' की दक्षिण- पूर्वी घाटी में कई शिखर हैं जिनमें सबसे ऊंचा 'लुंगसेर कांगड़ी' है- (6,666 मीटर) है।अन्य शिखरों- पोलोगोंग्का, कुला और छमसेर कांगड़ी पर एक के बाद एक पर्वतारोही दल चढ़ाई करते रहते हैं। 3/4
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चाकुला तथा ऐसी कई अन्य चोटियों अभी भी पर्वतारोहियों की प्रतीक्षा कर रही हैं। विस्तृत ऊसर घाटियां, त्सो मोरीरि झील का नीला जल, आकर्षक चंगपा और अन्वेषक पदयात्रा मार्ग, यही सब कुछ 'रूपशू' के पास है देने को। 4/4
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Sir pahle hamare Sadko ke gaddhe toh bharo. Har din 5 accidents hote hain..!
Thanks. Twitter will use this to make your timeline better. UndoUndo
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