मेरा हिमालय ============== जल के 'प्राकृतिक स्रोत' 'हिमालयी' क्षेत्रों में पीने तथा अन्य उपयोग के लिए पानी का एक प्रमुख संसाधन है। किन्तु उनके सूखने तथा जल- श्राव में आई कमी पहाड़ी जनजीवन के लिए एक प्रमुख समस्या के तौर पर उभरा है। 1/6
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इस वर्ष- फरवरी में प्रकाशित 'नीति आयोग' की रिपोर्ट - 'इन्वेंटरी एन्ड रिवाईवल आॅफ स्प्रिंगस आॅफ हिमालय फार वाटर सिक्योरिटी' में -50 प्रतिशत श्रोतों के सूख जाने अथवा मौसमी हो जाने को दर्शाया गया है। इसके उपचारात्मक सुझाव भी रिपोर्ट में दिए गये हैं। 2/6
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जल की समुचित उपलब्धता सभ्यता का महत्त्वपूर्ण अंग है और यही कारण है कि जल की अनुपलब्धता 'पलायन' के अन्य कारणों में एक प्रमुख कारण के तौर पर उभरी है। 'हिमालय' क्षेत्र में हिम एवं बर्फ का एक विशाल भंडार मौजूद है जो कि एक विशाल शुद्ध जलाशय का रूप भी है। 3/6
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अपनी हिमाच्छादित चोटियों तथा हिमनदों के कारण यह -एशिया के 'वाटर टावर' के रूप में जाना जाता है। 'ग्लेशियर' या हिमनद हिम का विशाल पिण्ड है जिसका निर्माण हिमकणों के पुनः जमाव द्वारा होता है। हिमनद तब बनते हैं जहां वार्षिक हिमपात उसके पिघलने की गति से अधिक होता है। 4/6
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कम तापमान और अधिक बर्फबारी द्रव्यमान संचय तथा इसके विपरीत, उच्च तापमान द्रव्यमान हानि का कारण बनता है। क्षेत्रीय भौगोलिक विविधता हिमालयी जलवायु तथा हिमनदों के बनने को काफी हद तक प्रभावित करती है। सर्व विदित है कि बर्फबारी शीतकाल में होती है। 5/6
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