अपनी विशिष्ट ऊंचाई के कारण हिमालय पर्वत अपनी जलवायु का स्वयं निर्धारण करते हैं चाहे पर्वतश्रंखला कहीं भी स्थित हों। सामान्यतः पर्वतीय जलवायु एक विशिष्ट ऊंचाई पर लगभग 3000 मीटर (10000 फीट )जहां हिम का स्थायित्व होता है, के मौसम का ही एक अस्पष्ट सा नाम है।
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हिमालय पर्वतों पर मौसम बहुत तेजी से, कभी-कभी नाटकीय रूप से बदलता रहता है। कहा जाता है कि हिमालय पर कभी-कभी एक ही दिन में वर्ष के चार विभिन्न मौसमों को देखा जा सकता है।
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कभी निर्मल आकाश में खिली धूप, चंद क्षणों में ठंडी हवा, उड़ते हुए बादल, घनघोर वर्षा व कड़कड़ाती ठंड में बदल जाती है। मौसम की अनिश्चितता पर्वतों की विशेषता होती है। हिमालयी पर्वतों के विभिन्न ऊंचाई पर भांति -भांति की जलवायु पाई जाती है।
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जहां निचले भागों में गर्म जलवायु होती है वहीं ऊपर जाने पर तापमान लगातार गिरता जाता है। इसी प्रकार जलवायु का परिवर्तन यहां के जीव -जंतु तथा वनस्पतियों की उपस्थिति पर भी व्यापक प्रभाव डालता है।
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सर आप शौभाग्यशाली है जो देवभूमि में जन्म लिया। धन्य है उस जगह का कण कण
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