मेरा हिमालय ============= 'उत्तराखंड हिमालय' की द्रोण की नगरी 'देहरादून' से भी 'स्वामी विवेकानंद' का करीबी रिश्ता रहा है। द्रोणनगरी को दो बार स्वामी जी के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ। स्वामी विवेकानंद ने अपनी आत्मकथा और भाषणों के संग्रह- 'लेटर्स फ्राम कोलंबो टू अल्मोड़ा'
-
Show this thread
-
में इसका वर्णन किया है। यह पावन भूमि स्वामी के अपने गुरूभाई से मिलन की साक्षी रही है। 'देहरादून' में राजपुर में शंहशाही आश्रम रोड पर 'प्राचीन बावड़ी शिव मंदिर' है, यही वह स्थल है जहां पर कुटिया में स्वामी जी के गुरू भाई स्वामी 'तुरियानंद' तप करते थे। 'अल्मोड़ा' से आते
1 reply 2 retweets 6 likesShow this thread -
समय 'स्वामी विवेकानंद' देहरादून आए। 'बावड़ी' के सुरम्य वातावरण में स्वामी विवेकानंद का मन रम गया। प्राकृतिक सोते, धरती के गर्भ से फूटती जल की पावन धारा और शांत वातावरण ने उन्हें वहां पर रुकने के लिए विवश कर दिया। बावड़ी में ही रहकर स्वामी जी ने साधना की, स्वामी विवेकानंद को
1 reply 0 retweets 2 likesShow this thread -
द्रोण नगरी -देहरादून की दैवीशक्ति अपनी ओर आकृष्ट कर रही थी। उन्होंने यहां पर 13 दिन तक तप किया। मैं स्वयं इस पवित्र 'बावड़ी मंदिर' के दर्शन करने कई बार गया और यहां पर भ्रमण करते हुए मुझे विश्वास हुआ कि
1 reply 1 retweet 10 likesShow this thread
इतने पवित्र स्थान पर महापुरुषों की शक्ति कहीं न कहीं अपनी उपस्थिति दर्शाती है। स्वामी जी ने उत्तराखंड हिमालय से जाते हुए वचन दिया था- 'मैं फिर आऊँगा......... अगले वर्ष........ और उससे अगले वर्ष भी'।
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.