मेरा हिमालय ============= 'उत्तराखंड हिमालय' की द्रोण की नगरी 'देहरादून' से भी 'स्वामी विवेकानंद' का करीबी रिश्ता रहा है। द्रोणनगरी को दो बार स्वामी जी के दर्शनों का सौभाग्य प्राप्त हुआ। स्वामी विवेकानंद ने अपनी आत्मकथा और भाषणों के संग्रह- 'लेटर्स फ्राम कोलंबो टू अल्मोड़ा'
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द्रोण नगरी -देहरादून की दैवीशक्ति अपनी ओर आकृष्ट कर रही थी। उन्होंने यहां पर 13 दिन तक तप किया। मैं स्वयं इस पवित्र 'बावड़ी मंदिर' के दर्शन करने कई बार गया और यहां पर भ्रमण करते हुए मुझे विश्वास हुआ कि
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इतने पवित्र स्थान पर महापुरुषों की शक्ति कहीं न कहीं अपनी उपस्थिति दर्शाती है। स्वामी जी ने उत्तराखंड हिमालय से जाते हुए वचन दिया था- 'मैं फिर आऊँगा......... अगले वर्ष........ और उससे अगले वर्ष भी'।
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