कुछ फसलों की प्रजाति ऐसी होती है जो कठोर वातावरण के अनुकूल होती है साथ ही, स्थानीय किसानों को भी उन्हें हासिल करने एवं उपजाने में आसानी होती है। इस प्रकार की फसलें न सिर्फ अपने दबाव प्रतिरोधक क्षमता और लचीलेपन के दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि ये अपने 'पौष्टिक' हितों के कारण भी
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महत्वपूर्ण हैं। ये फसलें न सिर्फ उन स्थानीय 'हिमालयी समुदायों' के लिए ही अच्छी हैं जो इन्हें उगाते हैं और बेचते हैं बल्कि ये विश्वभर की 'आनुवांशिक संसाधन' में भी अपनी हिस्सेदारी सांझा करती है।
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