इस अलौकिक परिवेश के पार्श्व में विद्या की देवी 'सरस्वती' गंगा के रूप में प्रवाहित होकर 'अलकनंदा' नदी में 'केशव- प्रयाग' पर संगम करती है। असत्य और अधर्म पर महाभारत के युद्ध में पांडव विजय प्राप्ति के उपरान्त "सत्यं- शिवम् -सुन्दरम" के सान्निध्य
-
-
Show this thread
-
में 'हिमालय' की ओर प्रस्थान करते हैं। हिमालयी प्रवास तथा यात्राओं के बाद पांडव 'हिमालय' से ही स्वर्गलोक की ओर प्रस्थान करते हैं। मोक्षधाम श्री 'बद्रीनाथ' से आगे 'स्वर्गारोहिणी मार्ग' धर्म व सत्य मार्ग के रूप में पूज्नीय है।
Show this thread
End of conversation
New conversation -
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.