टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी, अन्तर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी, हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता हूं ..गीत नया गाता हूँ...
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भगवान भारत की इस अविस्मरणीय पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें। अटल जी के इस राष्ट्र के लिए योगदान को चंद शब्दों में बांध पाना असंभव है परंतु सम्पूर्ण भारतवर्ष व इसका भविष्य सदैव आपकी राष्ट्रसेवा हेतु आपको याद करता रहेगा तथा आपका ऋणी रहेगा...
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उनकी याद में बस इतना ही लिख पाऊंगा कि.... बाधाएँ आती हैं आएँ.. घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।
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He is the iconic person of the era..will remain alive in our hearts till the end of this earth. God give peace to his divine soul.
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ठन गई मौत से ठन गई जूझने का मेरा इरादा न था मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था रास्ता रोक वह खड़ी हो गई यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई मौत की उमर क्या है?दो पल भी नहीं ज़िन्दगी सिलसिला,आज कल की नहीं मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ लौटकर आऊँगा,कूच से क्यों डरूँ?
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