मेरा हिमालय ================ 'हिमालयी -अर्थ व्यवस्था' प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 'कृषि' पर आधारित है। यह न सिर्फ 'हिमालयी क्षेत्र' की जनसंख्या को आहार उपलब्ध कराती है, बल्कि कृषि आधारित उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति भी करती है।
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हिमालयी राज्यों तथा हिमालय से निकलने वाली नदियों द्वारा सिंचित भू- भागों में की जाने वाली भूमि का उल्लेख को इस प्रकार वर्णित किया जा सकता है- 'हिमालय शीतोष्ण क्षेत्र'- हिमालय के शीतोष्ण क्षेत्र के अन्तर्गत जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल तथा अरूणाचल
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प्रदेश, ऊपरी असम शामिल है। इसे भी दो भागों में विभाजित किया गया है --पूर्वी भाग- जिसमें अरूणाचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैंड, त्रिपुरा, तथा ऊपरी असम जहां अधिक वर्षा होती है जो घने वनों से आच्छादित है। इसमें प्रमुख रूप से चाय तथा चावल की खेती की जाती है।
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पश्चिमी शीतोष्ण-- इस हिमालय के क्षेत्र मे जम्मू-कश्मीर,हिमांचल प्रदेश तथा उत्तराखंड शामिल है। बागान कृषि के अन्तर्गत सेब, चैरी, नाशपाती, सतालू, बादाम, खूबानी, अखरोट तथा आड़ू आदि शामिल हैं। इस क्षेत्र की अन्य फसल गेहूँ, चावल, आलू, मक्कई, कोदा, झंगोरा आदि हैं।
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