मेरा हिमालय ================= 'उत्तराखण्ड हिमालय' के वनों का वर्गीकरण ऊंचाई और स्थानीय जलवायु, मृदा की स्थिति पर काफी निर्भर करता है। 700 मीटर से कम ऊंचाई वाले भागों में 'उपोष्ण कटिबंधी वन' पाये जाते हैं।
-
Show this thread
-
जो कि 'दून भावर' एवं नदी घाटियों से कम ऊंचाई वाले स्थानों में देखने को मिलते हैं। इसमें साल, शीशम, सेमल, हल्दी, तुन, जामुन, शहतूत, रीठा, खैर, कुटकी आदि वनस्पति मिलती है। 700 मीटर से 1400 मीटर की ऊँचाई पर 'शीतोष्ण कटिबंधीय' वन पाये जाते हैं।
1 reply 0 retweets 2 likesShow this thread -
इसमें चीड़, कैल तथा गेठी वनों की मुख्य उपज है। इसमें चीड़ अधिक मात्रा में पाया जाता है। 1400 मीटर से 2800 मीटर की ऊँचाई वाले वनों को 'निचले एल्पाइन वन' कहा जाता है। इसमें बांज, बुरांस, मोरू प्रजातियों के वृक्ष पाये जाते हैं।
1 reply 0 retweets 3 likesShow this thread -
2800 मीटर सेे 3800 मीटर की ऊँचाई पर 'एल्पाइन वन' देखे जा सकते हैं। इसमें 4000 मीटर की ऊँचाई पर 'एल्पाइन वन' देखे जा सकते हैं। इन वनों में देवदार, स्प्रूस, सिल्वर फर्न, खरसू, ब्लूपाइन तथा अन्य नुकीली पत्ती के वन पाये जाते हैं।
1 reply 4 retweets 14 likesShow this thread
3800 मीटर से 4200 मीटर वन रेखा के मध्य वाले स्थानों को 'बुग्याल' अथवा 'कांठा' कहा जाता है। गर्मी व वर्षा में इन बुग्यालों में स्थानीय भेड़पालक बकरियां, तथा भैंस पालक भैंसों को चुगाते हैं। वेदिनी, रामणी, औली, फूलों की घाटी, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, ताली, खतलिंग, क्यार्की खाल,
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.