। पुरातन काल में जब कागज का आविष्कार नहीं हुआ था तो इस वृक्ष की छाल 'भोज पत्र' के रूप मे लेखन कार्य हेतु प्रयुक्त होती थी। प्राचीन धार्मिक ग्रन्थों, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक साहित्य 'भोज पत्र' में लिखित होने के कारण सुरक्षित है।
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देवभूमि का यह वृक्ष धार्मिक ग्रंथों, ऐतिहासिक साहित्य, पुराणों व पुस्तकों की तरह ही पवित्र वृक्ष के रूप में हिमालयी आस्था का गौरव है।
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