मेरा हिमालय ============== आपदा की दृष्टि से 'हिमालय' क्षेत्र संवेदनशील है, हाल में ही और पूर्व में भी 'उत्तराखंड हिमालय' में 'बादल फटने' की घटनाएं हुई हैं।उत्तराखंड के पहाड़ी जिले आपदा से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं और हमारी 'केन्द्र सरकार' निरंतर 'हिमालय और आपदा संभावित'
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पहाडों में यह घटना में भूस्खलन के साथ जानमाल की भी हानि होती है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि बादल फटने का लंबा पूर्वानुमान असंभव है, लेकिन कुछ घंटे पूर्व इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है और इसमें मदद करता है 'डाप्लर रडार' जो बादलों के घनत्व, हवा के प्रवाह व बादलों की
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स्थिति बताता है। यह उपकरण मौसम में रेडियो तरंगें भेजता है जो पानी व धूल कणों से टकराकर वापस लौटती हैं और सिस्टम उसके चित्र बनाता है। इस प्रणाली से बादलों की सघनता, ऊंचाई, गति नापी जा सकती है। ज्ञातव्य हो कि उत्तराखंड व हिमांचल के मौसम का मिजाज पटियाला के मौसम डाप्लर
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रडार से नापा जाता है, जिसकी जानकारी अंदाजे पर आधारित होती हैं। पटियाला का रडार करीब ढाई सौ किलोमीटर की रेंज के साथ हिमालय क्षेत्रों का मोटा पूर्वानुमान ही दे पाता है।
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