मेरा हिमालय =============== यह सर्वमान्य है कि संसार में सभी 'हिमक्षेत्र व हिमनद' लगातार सिकुड़ रहे हैं, भले ही इनकी सिकुड़ने की गति विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग आंकी गई है, जो उस जगह विशेष की स्थलाकृति व जलवायु पर निर्भर करती है।हिमालय की वृहत् व जटिल स्थलाकृति होने
-
Show this thread
-
की वजह से यहां पर भी हिमनदों के फैलने व सिकुड़ने की गति अलग-अलग है। इसलिए यह कहना तर्कसंगत होगा कि हिमनदों व फैलना व सिकुड़ना पूरी तरह से जलवायु व स्थलाकृति पर निर्भर है। मलबे का आवरण भी हिमनदों के पिघलने की दर को कम या ज्यादा करता है।
1 reply 0 retweets 1 likeShow this thread -
यदि आवरण 2 सेंटीमीटर से कम है तो पिघलने की दर अधिक होगी, यही आवरण 4 सेंटीमीटर से अधिक है तो पिघलने की दर थोड़ी कम होगी और यदि आवरण 1 मीटर से ज्यादा हो तो पिघलने की दर ना के बराबर हो जाएगी।
2 replies 3 retweets 9 likesShow this thread
क्योंकि मलबे का आवरण सूर्य के प्रकाश की धारा को रोकेगा व स्वउष्णता को भी बाहर नहीं आने देगा। यहां यह भी ज्ञात रहे की हिमालय के अधिकतर हिमनद इस श्रेणी में आते हैं।
7:51 PM - 14 Jul 2018
0 replies
3 retweets
11 likes
Loading seems to be taking a while.
Twitter may be over capacity or experiencing a momentary hiccup. Try again or visit Twitter Status for more information.