मेरा हिमालय =============== यह सर्वमान्य है कि संसार में सभी 'हिमक्षेत्र व हिमनद' लगातार सिकुड़ रहे हैं, भले ही इनकी सिकुड़ने की गति विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग आंकी गई है, जो उस जगह विशेष की स्थलाकृति व जलवायु पर निर्भर करती है।हिमालय की वृहत् व जटिल स्थलाकृति होने
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यदि आवरण 2 सेंटीमीटर से कम है तो पिघलने की दर अधिक होगी, यही आवरण 4 सेंटीमीटर से अधिक है तो पिघलने की दर थोड़ी कम होगी और यदि आवरण 1 मीटर से ज्यादा हो तो पिघलने की दर ना के बराबर हो जाएगी।
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क्योंकि मलबे का आवरण सूर्य के प्रकाश की धारा को रोकेगा व स्वउष्णता को भी बाहर नहीं आने देगा। यहां यह भी ज्ञात रहे की हिमालय के अधिकतर हिमनद इस श्रेणी में आते हैं।
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