हमारी बुद्धि दिखावे के आदर्शों के घेरे में इस प्रकार घिर गई है कि 'हिमालय' जो हमारे आदर्शों का देवता है, हम केवल मौखिक रूप से ही हिमालय का जयघोष, जय- जयकार करके सन्तुष्ट हो जाते हैं। हम अपनी इस गलती को तभी सुधार सकते हैं जब हिमालय के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें।
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उसका सम्मान करें, उस पर गर्व करना सीखें। हिमालय की महत्ता, पावनता, दिव्यता और विराटता का बोध हमारे लिए नितान्त अनिवार्य है। हिमालय मानवीय भावनाओं से लबरेज है, सत्यशीलता और सदाचार का उत्तम पाठ पढ़ाता है।
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हिमालय के पुनर्जागरण के लिए, हिमालय के सम्मान के लिए, हिमालय के लिए सम्मान और गर्व की भावना को जनमानस में जागृत करने के लिए - " आओ हम सब मिलकर इस विराट, भव्य, पूजनीय हिमालय का संरक्षण, संवर्द्धन करें"
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