मेरा हिमालय =============== उत्तरी हिमालय की सैकड़ों वर्ष पहले की भौगोलिक परिस्थिति के विषय में केवल हमारा अनुमान ही नहीं, बल्कि पुराणों में भी इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि सैकड़ों वर्ष पहले यह सारा हिमालय ही सघनवनाच्छादित था। वनों
का सघन होना इसका मुख्य कारण यह भी हो सकता है कि प्राचीनकाल से ही हिमालय में वृक्षारोपण की परम्परा चली आई है जिसका सीधा सम्बन्ध धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष से है।
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शारड्गर्धर संहिता में स्पष्ट प्रमाण मिलता है कि अपुत्रवान् व्यक्ति परलोक ऐषणा के हेतु मार्ग में वृक्षों का रोपण करे तो बहुत बड़ा पुण्य होता है, इस तरह के प्रमाण मिलते हैं।
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इसी काल में यहां पर किरात, पुलिन्द, तगण आदि जाति और ऋषि- मुनियों के अतिरिक्त सर्वसाधारण के लिए यह स्थान अगम्य था। सम्भवतः यही कारण था कि हिमालय के घने वन, औषधियों के लिए अब भी प्रसिद्ध हैं।
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