80000 की दारू का ब्रांड तो बता दे कम से।कम बेवड़े
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80000 की दारू का ब्रांड तो बता दे कम से।कम बेवड़े
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कौन सी चक्की का आटा खाना शुरू किया बे अब, जो करीना से टुनटुन बन गया 4 वर्षों में
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Hardik patel.... Karz mafi k liye kaam karte hue.... Exclusive photospic.twitter.com/js6gY1KaIa
किसान हमारे है अन्न दाता। सैनिक देते दिन रात सुरक्षा। शिक्षक दे देते है हमको ज्ञान। डाक्टर देते बिमारी से निजात। लेकिन ये खादी और खाखी क्या देते। खाखी से कुछ कहने से अच्छा हम पडोसी से क्यो कहते। और खादी वाले से हम क्यो ना कोई आस लगाते। अब तो मिडिया से भी सच ना कोई आस।
उन्होंने जवानों से कहा कि –
बलिदान न सिंह का होते सुना,
बकरे बलि बेदी पर लाए गए।
विषधारी को दूध पिलाया गया,
केंचुए कटिया में फंसाए गए।
न काटे टेढ़े पादप गए,
सीधों पर आरे चलाए गए।
बलवान का बाल न बांका भया
बलहीन सदा तड़पाए गए।
हमें रोटी कपड़ा मकान चाहिए।।
#UrbanCoward
एक शब्द का जोक- नोटबंदी.. दो शब्दों का जोक- अच्छे दिन.. तीन शब्दों का जोक- पंद्रह पंद्रह लाख.. चार शब्दों का जोक- बेटी बचाओ बेटी पढाओ.. पाँच शब्दों का जोक- दो करोङ नौकरी दिए जाएंगे.. छ: शब्दों का जोक- एक बार फिर से मोदी सरकार.. - कुल मिलाकर, मजाक मजाक में बीत गए चार साल...
जबरदस्त लगाई आपने भक्तो की
मोदी के लिए मुश्किल वक़्त पर ही क्यों सामने आते हैं 'शहरी नक्सली'?https://www.bbc.com/hindi/india-45389371 …
सबसे बड़ी समस्या है कि कोई सामने है हीं नही लोग किसको वोट करे?
और तुम कहते हो मोदी का विकल्प क्या है ? भाई, गली गली घूम रहे है मोदी के विकल्पpic.twitter.com/WYkKCk0qkr
अबे हार्पिक इस धूर्त के चक्कर मे मत पड़ पहले भी इसके चक्कर मे किसान दम तोड़ रहा था और ये धूर्त भाषण पेल रहा था
किसान की सांसें रुक गई लेकिन इसका भाषण नही रुका
@HardikPatel_pic.twitter.com/5A61Ko9EE9
पहले भी अन्ना को अपवास करवाकर दिल्ली की गद्दी पाया है इसनें बेचारे अन्ना का कुछ न हुआ
अब शहीद होनें की बारी हार्पिक की है

कुछ भी ट्वीट कर लो जनाब केजरीवाल जी ..... जिस प्रकार डीटीसी वाले आत्म हत्या करने पर मजबूर हो रहे है इससे लगता है आपको उनके परिवाजनों का श्राप लगेगा कभी सुखी नहीं रहोगे
@DtcEmployee @Rupika48916553 @gahlot_neelam @AamAadmiParty @DelhiGovtLive
ये सरकार जब सुनेगी जब इनके दरवाजे पर दम तोड़ोगे नहीं इस मे भी मोदी का हाथ हो सकता हैं। कुछ कहो अब केजरीवाल को दिल्ली वासियों की जरुरत नहीं है।अब तो चुनाव हरियाणा के अध्यापक जिता देगे।
एक तपस्या केजरीवाल ने भी की थी जिसका फल दिल्ली वाले आजतक भोग रहे हैं।
हार्दिक के दोनो हाथो मे लड्डू कर्जा माफ तो भी हीरो माफ नही हुआ तब भी हीरो। इसे सरकार को ब्लेकमैल करने की राजनीती कहते हैं समस्या हार्दिक नही है जो पर्दे के पीछे से गेम खेल रहे हैं समस्या वो हैं। हार्दिक गरीब था अचानक पैसा देखते ही बिक गया अब उस दौलत को बचाए रखने के लिए आंदोलन।
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